Shri Prabhat Times

* साम्प्रदायिक एकता की मिसाल है रामजी बाबा और गौरीशाह बाबा *

श्री प्रभात टाइम्स 26 फरवरी 2021होशंगाबाद

विशेष बिंदु
* संत शिरोमणि रामजी बाबा से गौरीशाह बाबा को पेश की जाती है प्रतिवर्ष चादर
* चादर को बड़े धूमधाम से निकालते है, सभी धर्म, नेता और प्रशासन अमला होता है शामिल
* वृंदावन मथुरा से मंगाई गई रामजी को चढऩे वाला निशान (ध्वजा)
* साम्प्रदायिक एकता की मिसाल है रामजी बाबा और गौरीशाह बाबा
* वर्षों से रामजी बाबा के नाम से आयोजित किया जाता था मेला
* वर्षों से आयोजित होने वाला रामजी बाबा मेला कोरोना के चलते पहली बार हुआ रद्द
* व्यापारी, आयोजकों एवं स्थानीय लोगों में मेला को लेकर मायूसी छाा ग है

मुख्य मान्यताओं के अनुसार
मां नर्मदा की नगरी होशंगाबाद में होशंगाबाद के प्रथम संत शिरोमणि रामजी बाबा और सूफी संत गौरीशाह बाबा की दोस्ती की मिसाल है जहां वर्षों से संत शिरोमणि रामजी बाबा मंदिर से एक चादर बड़े धूमधाम से निकाली जाती है जो उनके दोस्त गौरीशाह दाता की दरगाह पर चढ़ाई जाने के साथ ही संत शिरोमणि रामजी बाबा के नाम से होशंगाबाद के रामजी बाबा मंदिर के सामने मेले का आयोजन किया जाता रहा है। लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए शासन के निर्देशानुसार जिला क्राईसेस समिति के निर्णय पर 24 फरवरी से 10 मार्च तक लगने वाले रामजी बाबा मेले का आयोजन नहीं किया जा रहा है। साथ ही महाशिवरात्रि पर होने वाले पचमढ़ी मेले और तिलक सिंदूर में आयोजित मेले का भी आयोजन इस वर्ष कोरोना संक्रमण के चलते निरस्त किया गया है। लेकिन पूरी श्रृद्धा भाव से संत शिरोमणि रामजी बाबा मंदिर से चादर बैंड बाजों के साथ गौरीशाह दाता की दरगाह पर पेश की गई। जिसमें सभी धर्म के लोग शामिल होते है। अलसुबह 9 बजे रामजी बाबा समाधि स्थल पर आरती की गई जिसमें मुख्य नगर पालिका अधिकारी माधुरी शर्मा, भाजपा महिला प्रदेश अध्यक्ष माया नारौलिया, पूर्व पार्षद नंदकिशोर यादव, कार्यालय नगर पालिका अधीक्षक प्रशांत जैन सहित बड़ी संख्या में श्रृद्धालु शामिल हुए। रामजी बाबा मंदिर में मथुरा वृंदावन से ध्वजा को तैयार कर मंगाया गया है जिसे कल प्रतीक स्वरूप चढ़ाया जाएगा।

क्या कहा मंदिर के महंत ने

: रामजीबाबा मंदिर महंत श्यामदास पुजारी ने बताया कि संत शिरोमणि रामजीबाबा और गौरी शाह बाबा संत शिरोमणि रामजी बाबा के पास सत्संग के लिए आया करते थे दोनों आपस में धर्म को लेकर चर्चा करते थे जिसमें भगवान और अल्लाह दोनों ही एक है वहीं संत शिरोमणि रामजी बाबा मंदिर पर आज भी मजार खुदी हुई है और सूफी संत गौरीशाह बाबा की दरगाह पर मंदिर खुदा हुआ है मंदिर पर मुसलमान नमाज पढ़ सकते है और मजार पर हिंदू भजन कर सकते है एक बार ऐसे ही संत शिरोमणि रामजी बाबा नर्मदा जी के पल्ले पार जाया करते थे पैदल ही पानी पर से निकल जाया करते थे सूफी संत नर्मदा जी पर रूक गए और बाबा सूफी गौरी शाह बाबा को आत्मज्ञान बताया साथ ही चादर पर बिठाकर उन्हें नर्मदा जी को पार कराया।

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संतराम निषरेले
होशंगाबाद
मो. 9407268810

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