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महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. श्रीमती कामिनी जैन के मार्गदर्शन में शासकीय गृहविज्ञान स्नातकोत्तर महाविद्यालय होशंगाबाद में तीन कार्यशालाओं का आयोजन

श्री प्रभात टाइम्स होशंगाबाद

शासकीय गृहविज्ञान स्नातकोत्तर महाविद्यालय होशंगाबाद में आज दिनांक 27.08.2021 को स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ के अंतर्गत प्रारंभिक सत्र की तीन कार्यशालाओं का आयोजन महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. श्रीमती कामिनी जैन के मार्गदर्शन में किया गया। इन्होंने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा  कि इस प्रकार के आयोजन से छात्राओं को विभिन्न विषयों की जानकारी प्राप्त होती है जिससे उनके ज्ञान में वृद्धि और छात्राओं के व्यक्तित्व का विकास किया जा सके। इस प्रकार के कार्यक्रम में रोजगार एवं स्वरोजगार से संबंधित विभिन्न जानकारियां दी प्रदान की जाती हैं जिससे छात्राएं आत्मनिर्भर बन सकें।

प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ संगीता अहिरवार ने बताया कि  स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ के अंतर्गत यह कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं एवं छात्राओं को रोजगार और स्वरोजगार से जुड़ी हुई जानकारी प्रदान की जाती है इस प्रकार के कार्यक्रमों से छात्राओं के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और उन्हें अपनी रूचि और क्षमता के अनुरूप रोजगार का चयन करने में आसानी होती है।

अतिथि वक्ता के रूप में विषय विशेषज्ञ डॉ. रामबाबू मेहर ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन एवं प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया जिसमें उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता हेतु विभिन्न आंदोलन आंदोलनों की आवश्यकता क्यों पड़ी भारत में लगभग 190 वर्ष तक अंग्रेजों का शासन रहा अंग्रेज व्यापारी के रूप में हमारे यहां आए और उस व्यापार को आधार बनाकर इन्होंने भारत में शासन किया और ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना की और धीरे-धीरे अंग्रेजों ने भारत पर अपना अधिकार जमा लिया  अतः इस की जंजीरों को तोड़ने के लिए के लिए विभिन्न प्रकार के स्वतंत्रता आंदोलन चलाए गए जिसमें मजदूर आंदोलन किसान आंदोलन परिवर्तन आंदोलन  क्रांतिकारी आंदोलन आदि महत्वपूर्ण है इन आंदोलनों में राष्ट्रीय गुरुओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होने बताया कि इस प्रकार के स्वतंत्रता आंदोलन में होशंगाबाद एवं इसके आसपास के क्षैत्रों से लगभग 300 स्वतंत्रता सेनानियों ने भाग लिया। इन आंदोलनो के आगे ब्रिटिश गवर्नमेंट को झुकना पड़ा और गांधी जी के करो या मरो आंदोलन, असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन में अंग्रेजी शासन को समाप्त किया और इस प्रकार हम पराधीनता की बेडि़यों से छूटकर स्वाधीन हो गए।

विषय विशेषज्ञ श्रीमती किरण विश्वकर्मा द्वारा योग और स्वास्थ्य विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया गया जिसमें इन्होंने मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य के दो मुख्य आधार योग एवं प्राणायाम बताया है कि योग करने से शरीर को शक्ति मिलती और हमारा दिमाग शांत होता है हमारे शरीर में किसी प्रकार की कोई बीमारी नही होती योग करने से हमारे शरीर की पाचन ठीक तरह से कार्य करती है हमारा लीवर स्वस्थ्य रहता है। हमारे शरीर का रक्त संचार भी ठीक रहता है योग करने से हमारे अंदर का क्रोध नष्ट होता है और नेगेटिविटी खत्म होती है।

मुख्य वक्ता डॉ. दीपक अहिरवार ने जल संरक्षण एवं जल प्रदूषण विषय पर व्याख्यान दिया और बताया कि संपूर्ण विश्व के कुल जल का 97.5 प्रतिशत जल खारा है जो कि पीने योग्य नहीं है बचे हुए 2.5 प्रतिशत जल का 1.5 प्रतिशत जल बर्फ के रूप में पृथ्वी के ध्रुव पर स्थित है शेष 1 प्रतिशत जल नदियों तालाबों एवं भूमिगत जल के रूप में उपस्थित हैं। घर की व्यर्थ सामग्री नदियों में फेंकना जिससे बैक्टीरिया पनपते हैं। बैक्टीरिया जल की ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं जल में ऑक्सीजन की कमी होती है इससे जल में रहने वाले जीव जंतु और वनस्पतियां सड़ने लगती हैं इससे पानी में दुर्गंध आती है अतः पानी पीने योग्य नहीं रहता। घरों से निकलने वाला सीवेज और उद्योगों से निकलने वाला प्रदूषित जल नदियों में मिलते हैं अतः पीने योग्य जल प्रदूषित होता जाता है। अतः पीने योग्य जल की मात्रा अत्यधिक कम होती जा रही है इसलिए जल का संरक्षण करना अति आवश्यक हो गया है इस हेतु वाटर हार्वेस्टिंग कृषि पद्धतियों में जल के कम उपयोग वाली पद्धतियों का प्रयोग घरों में बाथरूम किचन वाहन धोने आदि मैं पीने योग्य जल का कम से कम प्रयोग कर जल का संरक्षण किया जा सकता है।

सुभाषित वाक्यों का बाचन डॉ. यशवंत निंगवाल ने किया और बताया कि उद्यम से ही कार्यो की सिद्धी होती है केवल इच्छा करने मात्र से नहीं और परिश्रम ही सफलता का मूलमंत्र है जो मनुष्य परिश्रम से भागता है वह

कभी सफलता प्राप्त नहीं कर सकता है।

कार्यक्रम का संचालन श्रीमती आभा बाधवा एवं आभार डॉ. रागिनी सिकरवार, श्रीमती नीलम चौधरी तथा कु. चारू तिवारी द्वारा किया गया। तकनीकि सहयोग डॉ. निशा रिछारिया ने किया।

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