Shri Prabhat Times

निरंतर 12 वर्षों से ईकोफ्रेंडली गणेश प्रतिमाओं का दिव्यांग बच्चों द्वारा निर्माण कर भक्तों बिना किसी मूल के दी जा रही है,

श्री प्रभात टाइम्स 10 सितंबर 2021होशंगाबाद। टोकियो ओलंपिक ओर वेक्सीन लगवाने का संदेश देंगे श्री गणेश, 10 सितंबर से 10 दिनों के लिए घरों घर विराजमान होंगी गणेश प्रतिमाएं। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी गणेश प्रतिमाओ को एक अलग आकार दिया है होशंगाबाद के दिव्यांग बच्चों ने इस वर्ष टोकियो ओलंपिक ओर कोरोना जैसी वैश्विक महामारी का एक ही

गणेश प्रतिमाओं को एक अलग आकार दिया है होशंगाबाद के दिव्यांग बच्चों ने इस वर्ष टोकियो ओलंपिक ओर कोरोना जैसी वैश्विक महामारी का एक ही •ईलाज वेक्सीन लगवाने का संदेश भी गणेश प्रतिमाओं के माध्यम से दिया जाएगा, भविष्य निःशक्त विशेष विद्यालय के बच्चों द्वारा इकोफ्रेंडली गणेश प्रतिमाओ का निर्माण कर पर्यावरण संरक्षण का भी कार्य किया जा रहा है। निःशक्तता किसी की मोहताज नहीं हो यही संदेश इन निःशक्त बच्चे ईकोफ्रेंडली गणेश प्रतिमा बना कर दे रहे हैं साथ ही टोकियो ओलम्पिक एवं लोगो के लिए वैक्सीन कितनी आवश्यक है, यही संदेश इस वर्ष इन दिव्यांग बच्चों द्वारा गणेश प्रतिमा के माध्यम से लोगों को संदेश देने का काम करेंगे।

नर्मदा समग्र के माध्यम से पर्यावरण के अनुकूल गणेश जी की प्रतिमा का निर्माण किया जा रहा है। मिट्टी की थेरेपी से दिमाग विकसित होता है, इसके चलते बच्चों की मनसिकता पर बहुत प्रभाव पड़ता है, क्योंकि मिट्टी को रोल करना, मोडना, गुथना जैसे काम दिव्यांग बच्चो के हाथों से किए जाते हैं। इस थेरेपी से बच्चों का ब्रेन डेवलप होता है, संस्था के एक बच्चा ठीक भी हुआ है इसी के चलते मिट्टी से बनी प्रतिमाओं का निर्माण दिव्यांग बच्चो से कराया जाता है।

दिव्यांग बच्चों द्वारा खेत की काली मिट्टी में गोंद, कागज़, बीज, अनाज के दानों का प्रयोग कर बनाया जाता है, ताकि विसर्जन के बाद भी पर्यावरण को इससे किसी प्रकार का नुकसान न हो सके।

प्रतिमाओं के निर्माण के समय मूर्ति श्रृंगार में दिव्यांग बच्चों द्वारा मूर्ति के बीच में एक बिज रखकर इस्तेमाल किया जाता है, ताकि नर्मदा जी में विसर्जन के दौरन अनाज उनको मछलियां खा लेती है। यदि विसर्जन नहीं भी किया जाता है, तो पानी में बह कर नदी के किनारे बीज द्वारा पौधे का निर्माण हो जाता है, वही प्रतिमाओं को रंग करने के लिए में हल्दी, कुमकुम, अष्टगंधा, रामराज, चूना, चाक मिट्टी एवं फूलों से बने रंग का प्रयोग करते हैं, ताकि पर्यवारण संरक्षण को बढ़ावा मिल सके।

निर्माण हो जाता है, वही प्रतिमाओं को रंग करने के लिए में हल्दी, कुमकुम, अष्टगंधा, रामराज, चूना, चाक मिट्टी एवं फूलों से बने रंग का प्रयोग करते हैं, ताकि पर्यवारण संरक्षण को बढ़ावा मिल सके।

करीब 12 वर्ष पहले इस संस्था भविष्य निःशक्त विशेष विद्यालय की शुरुआत हुई। सुरूवाती समय में करीब कुल सौ मूर्तियों का निर्माण किया जाता था। डिमांड बढ़ने के कारण वर्तमान में बच्चो द्वारा करीब ढाई हजार मूर्तियों का निर्माण कराया जा रहा है। ज्यादा डिमांड के चलते निर्माण के लिए ओर दिव्यांग बच्चो को ट्रेनिंग देकर मूर्तियां को घर में निर्माण कराया जाता है।

हर साल बच्चों द्वारा अलग अलग मूर्तियों को बनाकर लोगों तक जागरूकता पहुंचाने का काम करते है, पहले बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, गमला गणेश, जैसी प्रतिमाओं को आकार देकर जागरूकता पहुंचाई गई है। वही इस वर्ष टोक्यो ओलंपिक की थीम पर विवेक सागर, के माध्यम से हॉकी खेलते हुए, गोल्ड विजेता नीरज चोपड़ा भाला फेकते हुए, फुटबॉल खेलते हुए, प्रतिमा का रूप दिया गया है, साथ ही वह कोरोना जैसी वैश्विक महामारी को देखते हुए गणेश जी के माध्यम से आम जन तक वैक्सीन लगवाने का संदेश भी दिया जा रहा है।

ईकोफ्रेंडली गणेश जी की प्रतिमा के निर्माण के बाद होशंगाबाद शहर में दो स्थान पर स्टॉल लगाकर सहयोग राशि के मध्यम से लोगों को प्रतिमा उपलब्ध करवाई जाती है। साथ ही केवल सहयोग राशि की राशिद भी दी जाती है। इस सहयोग राशि के प्रयोग से संस्था के कार्य में किया जाता है, जिसके पास जितने पैसे होते है सहयोग राशि ले कर प्रतिमा उपलब्ध करवाई जाती है। सहयोग राशि का प्रयोग संस्था के उत्थान के लिए किया जाता है।

मूर्ति निर्माण में सभी प्रकार के दिव्यांग बच्चे अपने कौशल का प्रयोग करते हैं। संस्था की मुस्कान बोलने एवं सुनने में सक्षम नही है साइन लेंग्वेज के माध्यम से मुस्कान ने बताया के पर मुस्कान प्रतिमाओं को रंगने का काम करती है। वह करीब 5 वर्षों से प्रतिमाओं को रंगने का काम कर रही है। वह पेंटिंग में भी अव्वल रही है, मुस्कान पैंटीन में कई प्रतियोगिताओं में प्रथम रही है।

प्रतिमा उपलब्ध करवाई जाती है। सहयोग राशि का प्रयोग संस्था के उत्थान के लिए किया जाता है।

मूर्ति निर्माण में सभी प्रकार के दिव्यांग बच्चे अपने कौशल का प्रयोग करते हैं। संस्था की मुस्कान बोलने एवं सुनने में सक्षम नही है साइन लेंग्वेज के माध्यम से मुस्कान ने बताया के पर मुस्कान प्रतिमाओं को रंगने का काम करती है। वह करीब 5 वर्षों से प्रतिमाओं को रंगने का काम कर रही है। वह पेंटिंग में भी अव्वल रही है, मुस्कान पैंटीन में कई प्रतियोगिताओं में प्रथम रही है।

संस्था संचालिका भविष्य निःशक्त विशेष विद्यालय की अफरोज खान बताती ही 13 वर्षो से गणेश प्रतिमा का निर्माण कर रही है प्रतिवर्ष गणेश जी की प्रतिमा के मध्यम से अलग संदेश देते हुए बेटी बचाव, साक्षरता गमला गणेश जैसी मूर्तियों को रूप दिया गया है, जी की प्रतिमा गणेश है। संदेश देकर लोगो तक पहुंचाया जाता है, इस वर्ष संस्था के द्वारा कोरोना संक्रमण के चलते वैक्सीन लगवाने को लेकर जागरुकता के संबंध में प्रतिमा एवं टोक्यो ओलंपिक जैसा विवेक सागर गोल्डन पदक विजेता नीरज चोपड़ा का भी संदेश दिया जा रहा है।

लोगों तक पहुंचाया जाता है, इस वर्ष संस्था के द्वारा कोरोना संक्रमण के चलते वैक्सीन लगवाने को लेकर जागरुकता के संबंध में प्रतिमा एवं टोक्यो ओलंपिक जैसा विवेक सागर गोल्डन पदक विजेता नीरज चोपड़ा का भी संदेश दिया जा रहा है

संस्था के अध्यक्ष योगेश शर्मा बताते है करीब 12 वर्षों से ईकोफ्रेंडली गणेश प्रतिमाओं का दिव्यांग बच्चों द्वारा निर्माण कराया जा रहा है, मिट्टी को मोड़ना, गुंदने, घुमाने, मिट्टी को रूप देने से बच्चों में एकाग्रता आती है इसी के चलते उनके मानसिक विकास पर प्रभाव पड़ता है। सांथ ही बच्चों का ब्रेन डेवलप होता है। मूर्तियों के श्रृंगार में अनाज, से लेकर बीजों का प्रयोग किया जाता है। ताकि पर्यावरण संरक्षण हो सके।

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