Shri Prabhat Times

संतराम निषरेले को आरटीआई मेें देरी से जानकारी देने पर सचिव पर हुआ 25 हजार का जुर्माना

श्री प्रभात टाईम्स होशंगाबाद। जब से सूचना के अधिकार अधिनियम पारित हुआ कई भ्रष्टाचार के मामले उजागर हुए है। ऐसी दशा में अधिकारी और कर्मचारी चाहते है कि सूचना के अधिकार से प्राप्त आवेदन को जितना ज्यादा से ज्यादा निरस्त किया जा सके, भ्रमित किया जा सके जिसकी कोशिश लोक सूचना अधिकारी करते है और चाहते है कि आवेदक का जानकारी उपलब्ध न हो। जिसके चलते पुरजोर कोशिश करते हुए गलत पत्राचार भी कर देते है लेकिन जब मामला आयोग के समक्ष पेश होता है तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता है। ऐसा ही एक मामला है जहां पर संतराम निषरेले द्वारा लोक सूचना अधिकारी ग्राम पंचायत पीलीकरार तहसील बुदनी जिला सीहोर को किया था। जहां आवेदक श्री निषरेले ने ग्राम पंचायत कार्यालय पीलीकरार में सूचना के अधिकार आवेदन प्रस्तुत कर दिनांक 07 दिसंबर 2017 को जानकारी चाही थी। जिस पर लोक सूचना अधिकारी द्वारा समय सीमा में जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। जानकारी उपलब्ध न होने की दशा में दिनांक 10 जनवरी 2018 को प्रथम अपील सीईओ जनपद पंचायत बुदनी के समक्ष पेश की गई। प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा दोनों पक्षों को सुनने हेतु 24 जनवरी 2018 निर्धारित की गई साथ ही लोक सूचना अधिकारी को आदेशित किया कि जानकारी दो प्रतियों में लेकर पेशी पर उपस्थित होवे। प्रथम अपीलीय अधिकारी की आदेश को नजरअंदाज करते हुए ग्राम पंचायत सचिव पीलीकरार द्वारा जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। आवेदक संतराम निषरेले द्वारा दिनांक 27 फरवरी 2018 को आयुक्त महोदय मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया गया। आयुक्त महोदय के समक्ष प्रस्तुत आवेदन पर कार्यवाही करते हुए आयोग ने सुनवाई हेतु 20.02.2020 निर्धारित की गई। लोक सूचना अधिकारी ने सुनवाई से 4 दिन पूर्व आवेदक को जानकारी उपलब्ध कराकर आयुक्त मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग से बचना चाहा लेकिन ऐसा हो न सका। आयुक्त मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग के समक्ष आवेदन में लोक सूचना अधिकारी ग्राम पंचायत सचिव द्वारा बताया गया कि आवेदक के आवेदन को अधिनियम की धारा 7(8) के तहत निराकरण किया है जिसमें आवेदक का आवेदन निरस्त किया जाता है लेकिन लोक सूचना अधिकारी द्वारा ऐसे अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए जा सके जिससे प्रतीत होता कि आवेदक के आवेदन पर कार्यवाही की गई। वहीं मामले में देखा जाएं तो लोक सूचना अधिकारी आरंभ से ही प्रकरण के अंत तक आवेदक और प्रथम अपीलीय अधिकारी और आयोग को झूठे पत्राचार करता रहा जिसके चलते दिनांक 18 नवंबर 2020 को मुख्य आयुक्त महोदय ए.के. शुक्ला मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग द्वारा आदेश पारित करते हुए लोक सूचना अधिकारी ग्राम पंचायत सचिव रणवीर सिंह गुजर पर 25 हजार की शास्ति (जुर्माना) लगाया गया है राशि को एक माह में आयोग कार्यालय में जमा करानी होगी। साथ ही आदेश में जिला पंचायत सीईओ बुदनी को निर्देशित किया है कि लोक सूचना अधिकारी के जुर्माने की राशि सेवा पुस्तिका में अंकित की जावे जिससे लोक सूचना अधिकारी से सेवा काल में वसूली नहीं होने पर अंतिम भुगतान के समय उनके देयको से जुर्माने की राशि वसूली की जा सके।