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दिनांक: 20-Jun-2018, Wednesday ,Hoshangabad

कमिश्नर के आदेश की दुर्दशा या राजनैतिक दबाव...

निरंतर भाग 07...................

लापरवाही का पुलिंदा : चार माह में नहीं हुई जॉच, पूर्व कलेक्टर ने कमिश्नर के आदेश को डाला ठंडें बस्तें में

श्री प्रभात टाईम्स होशंगाबाद (संतराम निषरेले)। संभाग के मुख्यिा को लगातार खबरों के माध्यम से अवगत कराया जा रहा है कि संभाग में पदस्थ अधिकारी आपके आदेशों की अवहेलना कर रहें है इससे आम जनता की आशाओं पर पानी फिर रहा है और भ्रष्ट अधिकारियों के हौंसले सातवें आसमान पर है। आम जनता की आशाओं के लिये इससे बडी शर्म की बात क्या हो सकती है कि कमिश्नर के आदेशों को अधिकारी पालन न कर रहें हो और अपनी दादागिरी के साथ फाईलो में बंद करके रख दिया गया है।

मामला 1 - पूर्व कलेक्टर ने की आदेश की अवहेलना, अब नए से उम्मीद

जिला पंचायत अध्यक्ष के वाहन की लॉग बुक मेें अनेको अनियमित्ताओं के साथ फर्जी तरीके से तैयार की गई है। इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि अध्यक्ष ने लगभग 148 जगह अपने हस्ताक्षर नहीं किये, सिर्फ अपने पद की सील लगाई है और हस्ताक्षर किये ही नही हैं। फिर भी लॉग बुक को सही मानते हुये डीजल का भुगतान किया गया है। लॉग बुक में कई कॉलम खाली छोड़ दिये गये है। इस प्रकार की अनेंको अनिमित्ताएं है जिनके साक्ष्य सहित 4 माह पूर्व शिकायत आयुक्त कार्यालय में की गई साथ ही प्रधानमंत्री ,मुख्यमंत्री विभागीय मंत्री को भी की गई है और इस संबंध में आयुक्त नर्मदापुरम संभाग उमाकांत उमराव द्वारा दिनॉक 23 फरवरी 2018 को क्रमांक 1455/ शिकायत राजस्व/नक / 134/18 के माध्यम से कलेक्टर होशंगाबाद को जांच उपरान्त कार्यवाही करने के आदेश दिये गये है लेकिन आज दिनांक तक कमिश्नर के आदेश का पालन नही किया गया है।

क्या राजनैतिक प्रभाव के आगे बोना साबित हो रहा है कमिश्नर का आदेश

बात है राजनैतिक प्रभाव की तो कमिश्नर कार्यालय में कि गई शिकायत समस्त साक्ष्य के साथ होते हुई भी चार माह में एक जांच नही कर पाना सिद्ध करता है कि कमिश्नर के आदेश का पालन उनके अधीनस्थ अधिकारी कलेक्टर भीं नहीं कर रहे है। क्या इसके पीछे कोई और कहानी हो सकती है? यह तो जांच होने पर ही सामने आएंगी। विभागीय सूत्रों की माने तो मामला रफादफा कर दिया गया हैं। जबकि जांच में न तो शिकायतकर्ता के बयान लिये गये है और न ही शिकायतकर्ता को जांच प्रतिवेदन की एक प्रति दी गई है। बाबजूद विभाग में चर्चा है कि मामला तो रफादफा हो चुका है। शिकायतकर्ता इस बात की भी शिकायत उच्चस्तर पर करने जा रहा हैं कि जिस वाहन के लॉग बुक की जॉच कि जाना है वह जिला पंचायत अध्यक्ष कुशल पटेल के वाहन की है जो शासन ने उन्हें प्रदान किया गया है। ऐसा लग रहा है कि राजनैतिक प्रभाव के कारण कमिश्नर के आदेश को कलेक्टर भी नही मान रहें है या राजनैतिक डर से कोई अधिकारी कार्यवाही नहीं कर रहे है।

मामला 2 - समय बीतता गया मामला ठंडे बस्ते में जाता रहा

इस मामले में कमिश्नर साहब ने आदेश देने में इतने जल्दबाजी की थी तो ऐसा लग रहा था कि अब कमिश्नर साहब मामले में शीघ्र कार्यवाही करेंगे। लेकिन धीरे धीरे समय बीतता गया मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। बात यदि एकाद मामले में जॉच की हो तो मान सकते है लेकिन यहां तो सारे मामले पैनडिंग पड़े हुए है। एकाद मामले में किसी कारण से देर हो रही हो तो मान सकते है, लेकिन बात जब अनेको मामले में एक जैसे जबाव की हो तो लगता है कि कमिश्नर साहब केवल जबाव ही देते है और अंतिम जबाब तक तो फाईल ही जबाव दे देती है ऐसा हम नहीं कह रहे वहां की फाइले बया कर रही है। ऐसा ही एक और मामला जिला उद्योग विभाग होशंगाबाद जिले का है यह उद्योग विभाग के कुछ अधिकारीयों ने कुछ साठ गाठ करके कुछ लोगो को उद्योग  के साथ साथ सायद पक्के मकान बना कर रहने को भी दिये है इस लिये जिला उद्योग का कोई अधिकारी उद्योग क्षैत्र में यह सही जॉच करने को तैयार ही नही है कि कितने उद्योग पतियों ने अपने पक्के घर बना कर रह रहें है कितने उद्योग बंद है और कितने किराये पर चल रहें है ।

मामले को तीन माह बीत गए लेकिन न तो जांच हुई और न ही कार्रवाई

इन तामाम बातों की शिकायत आयुक्त कार्यालय में की गई थी कि इन बिन्दुओं पर सूक्ष्म जॉच की जाये और नियम विरूद्व चल रहें उद्योग पर कार्यवाही की जाये  लेकिन तीन माह बीत चुके आज तक न तो जॉच हुई न कोई कार्रवाई हुई। इतना ही नहीं इस बात की शिकायत संभाग के मुखिया से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों से की गई है। लेकिन किसी भी अधिकारी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। ना ही कार्रवाई करने की सोच रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही के कारण जिले में औद्योगिक क्षेत्र हो या सरकारी कार्यालय सभी जगह अनियमितताओं की भरमार है। ऑफिस सहायक से लेकर बाबुओं के हौंसले बुलंद हो रहे हैं और टेबल के नीचे से नोटों की गड्डियां सरकाई जा रही हैं। इसलिए अधिकारी ही नहीं जिम्मेदारों के हाथ भी सिर्फ जेब तक ही सीमित रहे गए हैं। फाइल अलमारी में बंद है और कार्रवाई के नाम कुछ नहीं। सिर्फ जब कोई वरिष्ठ अधिकारी भ्रष्टाचार की जानकारी लेता है तो उसे गोलमोल जवाब देकर रफादफा कर देते हैं।

News By: Prabhat Times

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