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दिनांक: 05-May-2018, Saturday ,Hoshangabad

जनसंपर्क कार्यालय ने किया फर्जी बिलो पर लाखो का भुगतान

न बिलों पर बिल क्रमांक,न टिन नंबर, न जीएसटी टिन नं. और न ही सीएस टिन नं.


श्री प्रभात टाईम्स होशंगाबाद (संतराम निषरेले)। संयुक्त संचालक जनसंपर्क कार्यालय में शासकीय राशि को हड़पा जा रहा है। सूत्रों की माने तो यहां कमीशन का खेल जोरो पर चलता है इसलिये किसी भी दुकान का बिल हो उसे अधिकारी ऑख बंद कर के पास कर दिया जाता है। लगता है यही कारण है कि जिम्मेदार अधिकारी न तो समाग्री की कीमत देखते न बिल की सच्चाई सिर्फ राशि देखते है और पास कर दिया जाता है। सूचना के अधिकार से प्राप्त दस्तावेज बता रहें है कि जनसंपर्क कार्यालय में लाखों का चूना लगाया जाता है प्रतिमाह, यदि किये गये भुगतानो की जॉच की जाये तो कुछ और नये फर्जीवाडे उजागर होने की संभावना व्यक्ति की जा रही है। विभागीय सूत्रों की माने तो कुछ फोटो कॉपी के नाम से हर माह सिर्फ बिल तो बनते है लेकिन फोटो कॉपी नही होती। इससे शासन का पैसा फर्जी बिलों पर खर्च हो रहा है अधिकारियों की जेब भरा रही है।

बगैर टेंडर के लाखों की खरीदी

कमीशन के चक्कर में अपने चहेतो को लाभ पहुचाने के चक्कर में बगैर टेंडर बुलाये लाखों की हर माह खरीदी हो रही है वह भी अपनी मन मर्जी से न तो रेट तह है न ही दुकान या सप्लायर जो ज्यादा कमीशन दे रहा है उसी के बिल आपको विभाग की फाईलों में नजर आयेगे। जबकि शासन का नियम है कि जब कोई विभाग किसी सामग्री का क्रय करेंगा तो निविदा आमंत्रित करेगा और जिसका दाम कम होगो उससे क्रय की जायेगी। लेकिन यहाँ जो ज्यादा कमीशन देगा उसी से समान खरीदा जायेगा इसी कारण न तो बिल पर बिल क्रमांक अंकित है न ही बिल का सही फॉरमेट है न टिन नंबर है इसके बाबजूद बिल पास कर दिये जाते है ।

बिल कहीं का सामान कही ओर का

जी चौकीये नही यहॉ कुछ भी हो सकता है 13 अक्टूवर 2017 को बिल क्रमांक 00008 गौरी फोटो कॉपी और कंप्यूटर का है। लेकिन न तो उस बिल पर फोटो कॉपी का भुगतान हुआ है और न ही कंम्प्यूटर कार्य का। यहॉ तो इस बिल के माध्यम से आल आउट टिकिया 300 रूपए का और सीएफएल 1035 रूपए के अगरबत्ती 28 रूपए एवं लेमिनेशन एक सौ रू का जो कि पूर्ण फर्जी लग रहा है। क्योंकि न तो गौरी फोटो कॉपी को विभाग ने सप्लाई आर्डर दिया न ही गौरी फोटों कापी पर यह समान विक्रेता है। न ही गौरी फोटो कॉपी के पास उक्त समान बेचने का पंजीयन है। फिर जनसंपर्क ने अधिकृत दुकानदारों से यह समान क्यों नही खरीदे? क्या शहर में अधिकृत दुकान या एजेंसी नही है या कही कमीशन की सेटिंग नही लगी ? यह दोनो की विषय जॉच के बिन्दु है ।

प्रेस नोट देना हुआ बंद फिर भी हर माह हजारों की फोटोकॉपी

सालो पहले जनसंपर्क कार्यालय के माध्यम से जो भी खबरें प्रकाशित होती थी उन्हें फोटोकॉपी करवाकर प्रत्येक समाचार पत्र कार्यालयों को दी जाती थी जिसके कारण अधिक फोटोकॉपी करवाना पड़ती थी। लेकिन मोदी सरकार ने कई फिजूली खर्चें बचाने के लिए ईमेल अनिवार्य किया है। जब से प्रेसनोट को ईमेल के माध्यम से चालू कर दिया है। जिससे समय की बचत और पैसे की बचत होना निश्चित है। लेकिन इसके बाबजूद हर माह फिर भी हजारो की फोटो कापी हर माह हो रही है क्या यह सिर्फ बिल तक ही सीमित है इस की जॉच होना चाहिए। क्योंकि किसी माह फोटो कापी का बिल लगा है तो किसी माह फोटो कॉपी के पेपर का या अन्य अनुपयोगी सामग्री का कुछ तो बिल में ऐसी समाग्री भी दर्ज है जो साल में एकाद बार खत्म होती है फिर भी हर माह खरीदी जा रही।

News By: Prabhat Times

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