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दिनांक: 05-May-2018, Saturday ,Hoshangabad

अधीक्षिका को बचाने उतरे पॉच अधिकारियो की नौकरी दॉव पर

अधीक्षिका को बचाने उतरे पॉच अधिकारियो की नौकरी दॉव पर

प्राचार्य निर्मला मेहरा, सहायक संचालक भरत शर्मा एवं सहायक आयुक्त चंद्रकांता सिंह ने अधीक्षिका को 420 के प्रकरण में दी क्लीन चिट देकर फंसे

 

श्री प्रभात टाईम्स होशंगाबाद (संतराम निषरेले)।कार्यालय सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग होशंगाबाद का पत्र कमांक आ.वि.शि.स्था/2018/1600 होशंगाबाद दिनांक 11.4.2018 के अनुसार जिसमें सावित्री किरार सहायक अध्यापक अधीक्षक कन्या परिसर होशंगाबाद के द्वारा अनुकंपा नियुक्ति से नियुक्त होने उम्र 55 साल होने का उल्लेख कर अधीक्षक कन्या शिक्षा परिसर होशंगाबाद से सीनियर जनजातीय कन्या छात्रावास होशंगाबाद में अधीक्षक के पद पर कार्य करने हेतु निवेदन किया गया। सावित्री किरार की अनुकंपा नियुक्ति संविदा शिक्षक वर्ग 3 के पद पर प्राथमिक शाला टांगना विकास खण्ड केसला में हुई है।
जिले में नवीन आवासीय कन्या शिक्षा परिसर मुख्यालय पर संचालित किये जाने के कारण अध्ययनरत छात्राओं के छात्रावास संचालन कर रही थी। कार्यालय आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग मप्र भोपाल के आदेशानुसार दिनांक 25.01.2018 को सहायक आयुक्त होशंगाबाद के आदेशानुसार जिन अधीक्षको को तीन साल से अधिक समय से पद पर जमे हुए है। उन सभी को शैक्षणिक संस्थाओं में अध्यापन कार्य हेतु पदस्थ किया जाना है। अत: सावित्री किरार को 3 साल से अधिक समय होने कारण कन्या शिक्षा परिसर होशंगाबाद से हटाया गया है। सहायक आयुक्त के आदेशानुसार लगभग 26 अधीक्षको को इधर से उधर किया गया। कुछ को तो आधे अधूरे आदेश दिये गये। उन्हे यह भी नहीे मालूम कि उन्हे अगले किस को चार्ज देना है। वाह रे ! विभाग की माया विभाग आदेश के बाद भी मजाल है कि एक भी अधीक्षक ने आदेश का पालन किया होता। होता भी कैसे सभी की सांठ गांठ के चलते आज सभी मनमानी पर उतर आये है। दिनांक 31 मार्च के सहायक आयुक्त के आदेशानुसार इस दिनांक के बाद से किसी भी अधीक्षिका के द्वारा बैंक खाते का संचालन किया जाता है तो उसके विरू़द्ध शासकीय नियमानुसार कार्यवाही की जावेगी। किंतु अधीक्षको के द्वारा आज भी बेखौफ बैंक से आहरण कर रहे हेैै। विगत माह सावित्री किरार के द्वारा आयुक्त नर्मदापुरम संभाग होशंगाबाद को पत्र द्वारा अनुविनय कर इसी परिसर में रहने हेतु आवेदन किया गया था साथ ही अपनी पारिवारिक परिस्थिति का हवाला दिया ताकि कुछ शिथिलता बरती जावें। यहॉ सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग के द्वारा दो टूक शब्दों में कहा गया कि सावित्री किरार सहायक अध्यापक मुख्यालय पर सेवा देने में असमर्थता व्यक्त करती है तो इनकी मूल पदस्थापना प्राथमिक शाला टांगना केसला में शैक्षणिक कार्य करने हेतु आदेशित किया जाना प्रस्तावित होगा।
सावित्री किरार के प्रचलित प्रकरण को सर्वप्रथम उपायुक्त आदिवासी नर्मदापुरम संभाग श्री जैन साहब को ध्यान में लाइ गई थी। किंतु ऐसा क्या हुआ कि प्रकरण को संज्ञान में लेने पर भी अपना हित साध कर जैन साहब अपने रास्ते हो लिऐ। इसके बाद जेपी यादव उपायुक्त आदिवासी नर्मदापुरम संभाग को इस प्रकरण के बारे ज्ञात कराया कि कन्या शिक्षा परिसर की अधीक्षिका के द्वारा इस तरह की गतिविधि संचालित की जा रही है। अधिकारी महोदय के द्वारा तत्परता दिखाते हुऐ औचक निरीक्षण किया गया किंतु अधीक्षिका की चतुराई के आगे उपायुक्त की एक न चली। अधीक्षिका के द्वारा बहुत ही कुशलता का परिचय दिया गया जिसमें विभाग जिस गतिविधि के लिए जाना जाता है वह कर दिखाया गया। अभी वर्तमान में सावित्री किरार के द्वारा कन्या शिक्षा परिसर होशंगाबाद में किये गये 420 प्रकरण की जॉच अधिकारियों को फांसी का फंदा बना हुआ है। जिसमें अधिकारियों के द्वारा सावित्री किरार को बचाने में अधिकारीयों की टोली आ खडी हैें। जिसके कारनामें आप सभी के सामने हाजिर है आज इस प्रकरण की जांच को प्रारंभ हुए लगभग चार माह से अधिक समय हो चुका है। किंतु जैसे जैसे समय बीतता जा रहा है वैसे वैसे ही नये नये अधिकारीयों का जुडाव होता जा रहा है अब समय आ गया है कि जनजातीय कार्य विभाग के मप्र शासन के जिम्मेदार पदो पर आसीन मंत्री महोदय एवं प्रमुख सचिव को भी ज्ञात होना चाहिए कि शासकीय पदो पर आसीन क्रमश: प्राचार्य सहायक संचालक, सहायक आयुक्त एवं उपायुक्त जनजातीय कार्य विभाग के सभी किस तरह से अपने कार्यो को अंजाम तक पहुॅचा रहे है।
सर्वप्रथम कन्या शिक्षा परिसर की प्राचार्य निर्मला मेहरा, सहायक संचालक भरत शर्मा ,सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभागं के द्वारा सावित्री किरार बचाने में सामने आये जिनके हाथ भी रंगे जा चुके है। प्रथम श्रेणी के अधिकारियों के द्वारा किस प्रकार से लापरवाही पूर्वके जॉचे की जा रहीे है यह र्दुभाग्य कहें या वेशर्मी की अपनी गलती को छुपाने के लिए किस हद तक पहॅुच सकते है। हद तो तब हो गई कि जब इतने पर भी विभाग को अपनी करनी पर पछतावा नही हुआ तो सावित्री किरार को बचाने में दो और भ्रष्ट अधिकारियों को जॉच में लगा दिया गया जिन्हे जॉच की विधिवत गतिविधि के बारे में ज्ञात ही नही है ऐसे अधिकारीयों को जॉच अधिकारी बना दिया। दोनो जॉच अधिकारियों को जॉच के मूल बिंदु से हटकर जॉच की जाना रूचिकर लग रहा है। सीधा सा प्रकरण है कि सावित्री किरार के द्वारा विभाग के नियमो के विपरीत जाकर संयुक्त बैंक खातें को एकल संचालित किया जा रहा है या नही किंतु जॉच अधिकारी को सावित्री किरार के द्वारा सौंपे गये दस्तावेजो से पूर्णत: साफ हो चुका है कि सावित्री किरार के द्वारा जॉच अधिकारी को जो बैंक से चैक की फोटो कापी लाकर के कूट रचना की गई उससे साफ हो चुका है कि सावित्री किरार के द्वारा विभिन्न सत्रों में मेस सचिव छात्राओं से हस्ताक्षर करा कर अपने ही जाल में फंस गई कि किस तरह से एक काले काम को बचाने में कितने अधिकारियों की जिंदगी दांव पर लगा दी।

News By: Prabhat Times

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